
आज उड़ान के बच्चो ने अपनी पहली रंगारंग प्रस्तुति दी |(उड़ान कूड़ा बीनने वाले बच्चो को पढाने की मुहीम है ) उन बच्चो ने जो कभी सोच भी नहीं सकते थे की मंच से कुछ करना कितना अलग होता है | आधे से ज्यादा लोग जो देखने आये थे यह उनके जीवन का पहला कार्यक्रम था और जो कर रहे थे उनके जीवन का भी पहला डांस कार्यक्रम | आज मेरा मन बहुत भावुक हो रहा था, कई बार पानी आँखों तक चला आया | प्रस्तुति से पहले मेरे मन में कुछ पंक्तियाँ आई उनको आपके साथ बाँटता हूँ | दोस्तों समाज अपना है इसको बदलने का ख्वाब देखते हो तो काम करना ही होगा , सपने कुछ नहीं बदलते अगर उनपर काम न किया जाए | कुछ समय समाज के लिए भी रखो क्यूंकि इससे बड़ी दवा नहीं है खुश रहने और उदासी से बचने की |

रौशनी पर लगा ग्रहण
अब हटने लगा है
किरणों से बनती छाया
समझ आने लगी है
छाज बनाते कुशल हाथ
अब अक्षर बनाने लगे है
और कूड़ा बीनती आँखे
कागज़ में शब्दों को देखने लगी है
अंगूठे के अनाकर्षक निशान
तिरछी रेखाओं में बदल गए है
बालो के उलझे धुल भरे गुचछे
चमकदार बाल बन गए हैं
कुछ खाली खाली आँखे
रौशनी से चमकने लगी हैं
कुछ बंद रहने वाले होंठ
कविता बुदबुदाने लगे हैं
मेरे बच्चो ने उड़ना नहीं सीखा है अभी
लेकिन उनके पंख दिखने लगे हैं